विवेक एक लड़की को तब से प्यार करता है जब उसने उस
लड़की को एक विवाह समारोह में पहली बार देखा था,
पहली ही नजर में विवेक को उस लड़की से प्यार हो गया
था,
अब तो विवेक का हाल बिल्कुल एक दीवाने जैसा था उसे अपने चारों ओर
सिर्फ वही लड़की ही नजर आ रही थी विवेक को न ही उसका नाम पता था न घर उसकी नजर
सिर्फ उसे ही ढूंढे जा रही थी तभी उसकी बुआ उसके पास आकर पूछा बेटा किसे ढूंढ रहे हो और क्या हुआ बुआ की
आवाज सुनकर विवेक एक मिनट के लिए बिल्कुल सन्न रह गया उसकी बुआ ने दोबारा फिर वही बात
दोहरायी,
विवेक ने धीरे से कहा कुछ नही फिर तुरंत उसने बुआ से कहा बुआ वो लड़की
कौन थी ,
बुआ ने पूंछा क्यों क्या करोगे शादी करनी है क्या उसके साथ ?
विवेक ने कहा नही मै तो बस
ऐसे ही पूछ रहा था ,
बुआ ने मजाक में कहा तुम्हारी पत्नी है बुआ अपनी बात समाप्त कर पाती
कि उसके पहले वो लड़की बुआ को ढूँढते हुए आयी और कहा बुआ आप यंहा है मैं आपको काफी
देर से ढूंढ रही हूँ,
आपको पापा बुला रहे है तभी विवेक ने बुआ से कहा इनका नाम क्या है बुआ
के कुछ बोलने के पहले ही वो बोल पड़ी,
मेरा नाम विभा है और उसने पूंछा आपका क्या नाम है?
विवेक कुछ सोंचते हुए बोला
विवेक,
उसके बाद विवेक कुछ सोचने लगा अरे क्या लड़की है बगैर कुछ पूंछे ही
बोलना शुरू कर दिया ,
विवेक जब तक इस उधेड़ बुन से बाहर निकला तो देखा कि बुआ और विभा दोनों
उसके सामने से जा चुकी थी अब विवेक सीधे अपनी मम्मी के पास जाकर बोला मम्मी खाना दे दो भूख लगी
है खाना देते हुए विवेक से मम्मी ने पूंछा क्या बात है परेशान दिख रहे हो ,
तभी पीछे से बुआ की आवाज
सुनाई दी विवेक को कुछ नही हुआ भाभी इसे विभा से प्यार हो गया है और विभा भी विवेक
को प्यार करने लगी हैं विवेक चुपचाप ये सब सुन रहा था और साथ ही ये सोचते हुए खाना खा रहा था
कि अगर विभा उसकी जीवनसाथी के रूप में मिल जाये तो वो बहुत ही खुशकिस्मत इंसान
होगा उसे पता ही नही चला कब खाना समाप्त हो गया विवेक अब विभा से मिलना चाह रहा था
उसके बारे में कुछ जानना चाह रहा था एक एक बार विवेक को ये मौका भी मिला पर विवेक
विभा के आगे बोल ही नही पाया सिर्फ इतना ही बोल पाया आप क्या करती है विभा ने कहा ग्रॅजुयेशन
सेकेंडियर कर रही हूँ और आप क्या कर रहे है ?
विवेक ने जवाब दिया एक मल्टी नेशनल कंपनी में
नौकरी कर रहा हूँ इसके अलावा दोनों एक-दूसरे से कुछ और भी न तो बात कर पाये और न
ही ज्यादा कुछ जान पाये पर दोनों की आँखों ने दिल की बात एक-दूसरे से बयां कर दी विवाह समारोह
सम्पन होते ही दोनों अपने -अपने परिजनों के साथ अपने घर चले गये लेकिन उन दोनो के
बीच रिश्ता जरुर बन गया था और वो रिश्ता था प्यार का ,
कुछ दिन बाद विवेक ने भी
ऑफिस ज्वाइन कर लिया करीब छः महीने बाद अचानक एक दिन विवेक के केबिन में एक ऑफिस
बॉय एक पत्र लेकर आया और कहा सर किसी विभा का पत्र आपके नाम आया है विवेक तो आफिस
के काम में ऐसा उलझा था कि वो लगभग भूल ही चुका था लेकिन उस दिन उस पत्र ने फिर
विभा की सारी यादों को ताजा कर दिया,
उस दिन विवेक ने अपना काम थोडा जल्दी समाप्त कर
अपने कमरे आ गया और विभा के पत्र को खोल कर पढने लगा उसमे विभा ने अपने घर
का टेलीफोन नम्बर दे दिया था और समय भी लिख रखा था की कब से कब तक सिर्फ वो ही फोन
रिसीव करेगी ,
बस फिर क्या था,
अगले दिन से फोन से बातचीत का सिलसिला प्रारम्भ हो
गया और दोनों को ये पता ही नही चला कि कब वो -दूसरे के इतने करीब आ गये कि एक
-दूसरे की आवाज सुने बगैर जीना मुश्किल हो गया समय अपनी गति से बढ़ता जा रहा था
विवेक विभा को क्या पता था उनके जीवन में और खुशियां आने वाली है तभी एक दिन विवेक की मम्मी का पत्र आया
जिसमे विवेक के सगाई की खबर थी इसी बीच विवेक की पदोन्नति भी हो गयी अब तो वो और
भी खुश था हर तरफ से उसे ख़ुशी ही ख़ुशी मिल रही थी ऑफिस में सब उसके काम की तारीफ
करते विभा तो जैसे उसे अपने से एक पल के लिए दूर ही नही होने देना चाह रही थी ,
वो दिन भी आ गया जिस दिन का
उसे बेसब्री से इंतजार था आज विवेक की सगाई विभा के साथ थी दोनों बहुत ही खुश थे
विवेक वापस अपने ऑफिस के काम में ब्यस्त हो गया लेकिन दोनों क्या खबर थी कि उनकी जिंदगी
में एक तूफान आने वाला है एक दिन विवेक की मम्मी उसके पास शहर आयी,
शाम को विवेक ऑफिस से अपने कमरे आया तो
मम्मी ने कहा बेटा हाथ -मुंह धुल लो ,
मै गरमा-गर्म चाय बनाती हूँ चाय पीते समय मम्मी ने
विवेक को बताया कि उसकी सगाई टूट गयी है मम्मी ने बताया कि एक ही गोत्र का होने की वजह
से सगाई टूटी है ये बात एक दूर के रिश्तेदार ने बतायी थी पर विवेक को जैसे यकीन ही
नही हो रहा था ,
फिर विवेक सोचने लगा कि शायद विभा इसी वजह से दस दिन से उसका फोन नही
रिसीव कर रही है उसे लगा था कि घर की फोन लाइन ख़राब हो गयी होगी तभी घंटी बज रही
है पर कोई फोन रिसीव नही कर रहा है विवेक को इन सब चीजों से काफी गहरा झटका लगा अगले
दिन सुबह विवेक ऑफिस पहुँच कर सबसे पहले विभा के घर फोन किया,
टाइमिंग गलत होने के कारण
विभा ने फ़ोन रिसीव कर लिया,
जैसे ही विवेक ने हैलो कहा उसके बाद उसे कोई आवाज
नही सुनाई दी बस सुनाई दिया तो किसी के रोने की आवाज ,
विवेक को ऐसा लगा की शायद
ये विभा है लेकिन वो विभा ही थी उसने रोते हुए विवेक से कहा हमारी सगाई तो टूट गयी,
किन्तु अब क्या मै तुम्हारे अलावा किसे दूसरे व्यकित से विवाह नही कर सकती और न
ही कभी इस बारे में सोच सकती हूँ अगर मेरे परिजन किसी और से मेरा विवाह करते है तो
आत्महत्या कर लूंगी,
विवेक ने बहुत समझाने की कोशिश की,
लेकिन उसका विभा से कुछ
कहना ही बेकार था अब विवेक भी क्या करता उसे भी कुछ समझ में नही आ रहा था वह भी
थोडा उदास रहने लगा,
ऑफिस के किसी काम में उसका मन ही नही लगता था ज्यादा किसी से बात भी
नही करता था हमेशा गुमसुम तथा खोया-खोया सा रहता था सारे काम उलटे हो रहे थे,
आफिस में वह थोडा खुश रहने
की कोशिश करता लेकिन विवेक अब पहले जैसा दिल से खुश नही रह पाता था कुछ दिन बाद वह
बीमार पड़ गया और ऐसा ही कुछ हाल उधर विभा का था उसने भी कॉलेज जाना बंद कर दिया था
और वो भी बीमार पड़ गयी थी लेकिन दोनों के परिजन कुछ समझ नही पा रहे थे दवाओ का उन
दोनों पर कुछ असर ही नही हो रहा था,
इसी बीच विवेक को उसकी कंपनी ने टर्मिनेट कर दिया,
विवेक को अपनी नौकरी से
निकाले जाने का बहुत ही बड़ा सदमा लगा,
इस सदमे को विवेक नही बर्दास्त कर पा रहा था,
वह पूरी तरह से पागल सा हो
गया था आखिर एक दिन दोनों ने घर छोड़ने का फैसला ले लिया | और दूसरे शहर में जाकर
रहने लगे, तीन वर्ष बाद दोनों के घर
एक संतान की उत्पति हुई जिसका नाम विवेक विभा ने राजीव रखा| शाम को बाजार से वापस
आते समय तेज रफ्तार कार ने विभा को कुचल दिया जिसमे विभा की मौके पर ही मृत्यू हो
गयी विवेक को इतना गहरा सदमा लगा की वो बेहोश हो गया ,
विवेक के मित्रो ने अस्पताल
में विवेक को भर्ती किया लेकिन विवेक फिर कभी होश में नही आ पाया डाक्टरों ने
बताया कि विवेक कोमा में जा चुका है राजीव का पालन पोषण विवेक के एक दोस्त ने किया
|राजीव पढ़ाई में काफी अच्छा तथा स्मार्ट भी था जिसकी वजह से उसके कालेज में कई लड़कियां उसके
आगे पीछे घूमती थी लेकिन वो कभी उनकी तरफ नजर उठा कर देखता भी नही था कई
लड़कियां उसके पास आकर दोस्ती करने के ऑफर देती लेकिन पता नही क्यों वो सभी
से दोस्ती के मना कर देता था शायद उसके किसी लड़की से दोस्ती न करने की
कोई वजह रही होगी,
मैंने काफी उसके बारे में काफी छान -बिन की तो जो मुझे पता चला वो
बहुत ही हैरान करने वाले तथ्य थे,
उसकी माँ ने उसे जन्म तो जरुर दिया था लेकिन
पाला उसके पिता ने था क्योंकि उसके माता-पिता ने भी प्रेम -विवाह किया था राजीव के
माता -पिता के बीच कुछ दिन तक तो सब कुछ ठीक -ठाक चल रहा था मगर जब राजीव छोटा था
तब उसके पापा को उसकी मम्मी पर किसी वजह से शक था वैसे सभी जानते है कभी भी शक की
बिनाह पर बना रिश्ता कभी न कभी टूट ही जाता है वही राजीव के साथ हुआ एक दिन उसकी
माँ ने उसके पापा को हमेशा के लिए छोड़ कर चली गयी थी तभी शायद राजीव जल्दी
कभी किसी लड़की की तरफ ध्यान नही देता था मुझे यह सब बता कर उसके पापा रोने लगे थे
और उन्होंने कहा था बेटा कभी किसी लड़की से प्यार मत करना,
जहाँ तक मेरी समझ है की
शायद ही कोई ऐसा हो जिसे कभी किसी से प्यार ही न हुआ हो {
क्योंकि मेरा अपना मानना है
लड़की एक मीठा जहर है }
क्योकि प्यार चीज है जो जिंदगी के किसी न किसी मोड़
पर हर किसी को होता है वही राजीव के साथ हुआ उस दिन कालेज में राजीव की नजर एक
लड़की पर पड़ी जिसे वो न चाहते हुए देखने पर मजबूर हो गया आखिर कौन थी वो लड़की क्या
नाम था ?
यही सब राजीव सोच था लेकिन उसे कुछ भी पता था एक दिन जब राजीव
लाइब्रेरी में कोई पुस्तक ढूंढ रहा था तभी उसे वो लड़की दिखी ,
वो एक तरफ बैठी कुछ पढ़ रही
थी राजीव जब उस तक पहुच पाता कि वो लड़की उठी और लायब्रेरी से बाहर निकल गयी,
मुझे कुछ समझ नही आ रहा था
कि आखिर राजीव उस लड़की के लिए इतना क्यों परेशान है मैंने राजीव से पूंछ ही लिया
कब से उसे प्यार करते हो,
राजीव थोडा न नुकर कर बोला जब से उसे देखा उसका दीवाना हो गया हूँ यार तुम कुछ करो,
मैंने कहा राजीव यार अंकल
ने तो प्यार कभी न करने के लिए कहा था और तुम शायद उससे प्यार करते हो राजीव ने कह
ही दिया यार दिल है की मानता नही क्या करूँ जब से उसे देखा है पागल सा हो गया हूँ
दिल करता है सिर्फ उसे ही देखता रहूँ मैंने बीच में ही बोल दिया भाई क्लास भी
ज्वाइन करनी है वो लड़की शायद अपनी ही क्लास की हो,
मेरा कहना सही ही था क्लास में देखा तो दंग रह गया
वो लड़की हमारी ही क्लास की थी उसका नाम जानने के लिए मैंने अपनी एक दोस्त से उसका
नाम पूंछा तो उसने कहा क्या करोगे उसका नाम जान कर मैंने उससे कहा राजीव उससे
प्यार करने लगा है यह सुनकर वह हंसने लगी और कहने लगी पत्थर में कब से जान आ गयी,
पता नही कितनी लड़कियों का
दिल थोडा है राजीव ने,
उसका नाम रश्मि है वो राजीव से पटने वाली नही है शायद राजीव उसके
बारे में नही जानता है मैंने कहा ऐसा क्या है उसने मुझे बताया कि रश्मि के मम्मी पापा बचपन
में गुजर गये थे और उसका पालन-पोषण उसकी बुआ ने किया है वो अपनी बुआ के साथ रहती
है उसकी बुआ को उनके प्रेमी ने धोखा दिया है रश्मि की बुआ ने उसे सख्त हिदायत दी
है कभी किसी लड़के के प्यार में मत पड़ना ये प्यार धोखा है इसी वजह से वो कभी किसी
लडके को अपने पास नही आने देती है न ही जल्दी किसी लड़के से बात करती है इतना सुनकर
मै तो पूरी तरह से पागल हो चुका था क्योंकि दोनों के पैरेन्ट का एक ही जैसे कहना
था मैंने सोचा राजीव को सब बताता हूँ इसके साथ ही उसे एक सलाह भी दूंगा भाई उस
लड़की को भूल जाओ लेकिन मेरा सोचना शायद गलत था मैंने जब राजीव को ये सारी बातें
बतायी तो उसने कहा प्यार करता हूँ रश्मि को,
मेरा प्यार मजाक नही है अगले दिन कालेज की कैंटीन
में हम और राजीव चाय पी रहे थे तभी हमने रश्मि को लायब्रेरी की तरफ जाते जैसे देखा वैसे ही राजीव चाय छोड़
कर लायब्रेरी की तरफ भगा,
मुझे लगा राजीव आज अपने प्यार का इजहार जरुर करके रहेगा अपनी चाय
समाप्त करके मै भी लाइब्रेरी की तरफ चल दिया लेकिन ये क्या?
दोनों लाइब्रेरी में नही थे मैने राजीव को फोन
किया तो उसका मोबाइल पहुच के बाहर बता रहा था अगले जब मै राजीव के घर पंहुचा तो
उसके पापा ने बताया कि वो घर नही आया है इतना सुनकर मै तुरंत पुलिस स्टेशन की तरफ
भगा वहाँ पता चला कल एक लड़का और लडकी बस में बगैर टिकट पकड़े गये थे उनके पास
जुर्माना देने के लिए रुपये नही थे हवालात में है दोनों,
लड़के का राजीव और लड़की का
नाम रश्मि है मैंने वहाँ कागजी कार्यवाही समाप्त किया तब इंस्पेक्टर ने एक चेतावनी
दे कर दोनों को छोड़ दिया पुलिस स्टेशन से बाहर जाते हुए मैंने राजीव से
पूंछा तुम कल लाइब्रेरी से कहाँ चले गये थे अपने प्यार को पाने के चक्कर में यहाँ
तक आ पंहुचा रश्मि ने कहा न तो मुझे टिकट लेने दिया और न स्वयं लिया जिसका परिणाम
यहाँ तक आ गये इतना कहकर रश्मि अपने घर की तरफ निकल गयी मैंने राजीव से कहा कुछ
बात हुई तो उसने हाँ में जवाब दिया लेकिन वो सिर्फ अभी मेरी है हमने भी ऑटो पकड़ा
और घर की तरफ चल दिया रश्मि के घर पहुचकर देखा कि घर में उसके भैया और भाभी आये है
बुआ ने कहा रात भर कहाँ थी रश्मि थोडा झेंपते हुए बोली निशा के घर में
प्रोजेक्ट तैयार कर रही थी और अपने कमरे के अंदर चली गयी रश्मि ने शायद पहली बार
झूंठ बोला था इसी वजह से डरी हुई भी थी भाभी रश्मि पास आकर बोली रात में तुम निशा के साथ तो नही थी
निशा का फोन आया था वो तुम्हे पूंछ रही थी फोन मैने रिसीव किया था अब सच-सच बताओ रात भर कहाँ थी किसी
बॉयफ्रेंड के साथ,
रश्मि रोने लगी और बताया कि कहाँ थी बगैर किसी गलती के रात भर उसे
हवालात में गुजारनी पड़ी थी भाभी ने कहा उससे प्यार करती हो या नही रश्मि ने कहा
प्यार,
बुआ ने तो मना किया है भाभी हंसने लगी और कहा बुआ की छोडो प्यार करके
देखो दुनिया बहुत खूबसूरत है उस लडके से प्यार करो जिसे तुम पसंद करती हो अपनी
जिंदगी जी भर कर जियो ,
यह कहकर भाभी ने कहा ठीक है आराम करो,
राजीव के घर पहुचते ही उसके
पापा ने कहा जाओ आराम कर लो सुबह बात करेंगे लेकिन राजीव को निंदा नही आती है वो सिर्फ रश्मि
के बारे में सोचता रहता है अगले दिन राजीव कालेज के लिए तैयार हो रहा था तभी उसके
पापा उससे फिर कहते है बेटा कभी किसी से प्यार मत करना लड़कियां लड़को को सिर्फ पूरी
उम्र रुलाती ही है,
अब राजीव करे तो क्या करे आखिर उसे भी रश्मि से प्यार हो ही गया था यही सब
सोचते हुए राजीव कालेज कब पहुच गया उसे पता भी नही चला,
मैंने राजीव से कहा भाई कल
घर पर ज्यादा डांट तो नही मिली राजीव ने हँसते हुए कहा पापा का वही
पुराना भाषण प्यार मत करो,
लेकिन क्या करें प्यार तो हो गया है उस दिन रश्मि कालेज नही आयी राजीव
काफी परेशान था ,
हम दोनों ने उसकी सहेलियों से बात की लेकिन किसी को कुछ नही
पता था रश्मि को देखने लडके वाले उसके घर आये थे उसके घर में सभी लोग खुश थे पर
केवल एक इंसान नही था वो स्वयं रश्मि थी क्योकि उस दिन हवालात में बीस घण्टे राजीव
के साथ रहने मात्र से ही रश्मि को राजीव से प्यार हो गया था इस बात का अहसास उसे
तब नही था लेकिन आज उसे राजीव की बहुत याद आ रही थी और वो राजीव की याद में रो रही थी तभी उसे
निशा की आवाज सुनाई दी रश्मि ने जल्दी से अपने आंसू पोंछे की कंही निशा देख न ले
पर वो जब तक अपने आंसू पोंछ पाती निशा उसके सामने खड़ी थी निशा ने कहा तुम रो रही
हो रश्मि ने कहा नही यार बस ऐसे ही आँख भर आयी और तभी तुम आ गयी निशा ने चुटकी
लेते हुए कहा आँख भर आयी थी या फिर राजीव की याद आ रही है मै अपनी दोस्त को बचपन
से अच्छी तरह से जानती हूँ वो झूंठ भी नही बोल पाती है अरे तुम से ज्यादा तो राजीव परेशान होगा
जब उसे पता चलेगा कि तुम्हे देखने के लिए लडके वाले तुम्हारे घर आये थे उसके दिल
पर गुजरेगी इसका तुम्हे जरा सा अंदाजा भी नही है वो तुम से बेहद प्यार करता है यार
अभी भी कुछ नही बिगड़ा है निशा की सारी बाते रश्मि चुपचाप सुन रही थी कुछ बोल नही पा रही
थी सिर्फ रोये जा रही थी उसे कुछ समझ नही आ रहा था निशा भी चुपचाप उसके पास से चली
गयी बुआ ने निशा से कहा बेटा खाना खा कर जाना निशा ने जवाब दिया ठीक है बुआ जी,
निशा की भी हिम्मत नही पड
रही थी कि वो बुआ को बता सके कि रश्मि राजीव से प्यार करती है इसी उधेड़ बुन
में निशा खाना खाकर कब रश्मि के घर निकल गयी उसे पता ही नही चला वो पूरे रास्ते में सोचती रही
राजीव से क्या कहूँगी यही सोंचते-२ निशा अपने घर पहुँच गयी रश्मि को लडके
वालों ने पसन्द कर लिया था और उसी दिन उन्होंने ने रश्मि की बुआ को बता भी दिया कि आपकी बेटी हमें
पसन्द है यह बात सुनकर रश्मि की बुआ भइया-भाभी सभी लोगों की खुशियाँ दोगुनी हो गयी पूरे घर में ख़ुशी
का माहौल है लेकिन रश्मि नही खुश थी वो अपने कमरे में बैठी रही थी क्योंकि वो
राजीव को दिल से प्यार करने लगी थी और घर में इस बात को सबसे बताने से डर रही थी
पर कर भी क्या सकती थी तभी उसे किसी के आने की आहट महसूस हुई उसके आंसू पोंछने से
पहले ही भाभी उसके सामने खड़ी थी भाभी ने पूंछा क्या हुआ क्यों रो रही हो रश्मि ने
कहा भाभी बस यू ही मम्मी पापा की याद आ गयी थी भाभी ने मजाक करते हुए कहा मम्मी पापा
या किसी ब्यॉयफ्रेंड की याद आ रही है भाभी आप भी क्या हर समय
सिर्फ मजाक ही करती रहती है रश्मि ने कहा भाभी ने कहा ठीक है अब रोना बंद करो और
सो जाओ सुबह कालेज भी तो जाना है अगले दिन मै कालेज थोडा जल्दी पहुच गया था उस मै
कुछ ज्यादा ही खुश था कैंटीन में बैठे एक गुन गुना रहा था “चाँद तारे फुल शबनम तुम से अच्छा कौन है कोई
ऋतु हो कोई मौसम तुम से अच्छा कौन है “तभी मुझे कंधे पर किसी के स्पर्ष का अहसास हुआ
पीछे मुड़कर देखा तो निशा मुसुकुरा रही थी उसे कहा क्या बात है अजय आज बड़े रोमांटिक
मुड में हो मैंने कहा क्या खुबसूरत मौसम और उससे भी ज्यादा खुबसूरत तुम हो तो थोडा
रोमांटिक होना तो बनाता है निशा ने कहा बस ज्यादा मेरी तारीफ न करो न ही
तो मै तुमसे प्यार न करने लग जाऊ और तुम ठहरे पत्थर दिल इन्सान जिसके सामने आंसुओ
की कोई कीमत ही नही है वो क्या जाने की प्यार क्या होता है तभी मैंने जवाब दिया सच
कहा यार निशा बहुत कोशिश की मुझे भी प्यार का अहसास हो पर आज तक मुझे कभी नही समझ
आया की प्यार है क्या चीज ,
निशा ने पूंछा राजीव कंहा है मैंने जवाब दिया
यार अभी तक तो नही दिखा पता नही कहाँ है आज मै भी उसे बुलाने उसके घर नही गया
क्योकि अब वो भी बदल गया है जब से उसे रश्मि से प्यार हुआ है न तब से भाई साहब न
हर वक्त रश्मि-२ की रट लगाये रहते है बड़ा अजीब लगता है कि ये मेरा वही मित्र है जो
हमेशा मेरे साथ घूमता था बाते करता था पर अब वैसा नही रह गया यार अच्छा तुम बताओ
रश्मि कहाँ है तुम्हारे साथ नही है क्या हुआ तबियत ख़राब है या फिर और कुछ निशा ने
थोडा दुखी होते हुए बोली पहले तुम प्रोमिस करो की राजीव का साथ तो नही छोड़ेगे
मैंने कहा ऐसी क्या बात है जो तुम इस तरह बोल रही हो तब उसने मुझे जो बताया मेरे
तो पैरो तले जमीन ही खिसक गयी मै राजीव के बारे में सोचने लगा कि ये बात उसे कैसे
बताऊ समझ नही आ रहा था बात नही मैंने निर्णय लिया की इस बारे में राजीव को कुछ भी नही
बोलूँगा और निशा से भी कहा तुम भी मत कुछ कहना सही समय पर राजीव को सब बता देंगे
उस दिन न ही राजीव कालेज आया और न ही रश्मि उस दिन पूरा समय निशा मेरे साथ थी हम
दोनों ने पूरा दिन खूब मजा किया निशा पूरा समय छोटी -२ बात पर मुझे ध्यान से देखे
जा रही मै उससे ऐसे बिहैव कर रहा था जैसे मुझे कुछ पता ही नही है उसने एक बात मुझे
पूंछी अजय ये बताओ मै कैसी दिखती हूँ मैंने कहा रुको जमीन से मिटटी उठा कर उसके
गाल पर लगा के बोला अब अच्छी लग रही हो वो शर्मा गयी मैंने कहा निशा क्या हुआ उसने
जल्दी से गाल की मिटटी छुटाई और कहा इस बार होली में तुम बच नही पाओगे मैंने कहा
देखते है मैंने निशा को उस दिन उसके घर छोड़ा और फिर अपने घर निकल गया,
लेकिन एक बात से मै हैरान था आज निशा मुझे कुछ ज्यादा ही अच्छी लग
रही थी समझ नही आ रहा था उधर निशा का भी वही हाल था निशा अजय के ख्यालो में खोई थी
शायद यही प्यार है सुबह कब हो गयी पता ही नही चला मेरी दीदी चाय लेकर आई और जगाया
तो मै दीदी को देखकर हैरान रह गया मैंने पूंछा दीदी आप कब आयी तो दीदी ने कहा रात
में और तुम्हारे जीजा भी आये है मैंने सवालिया लहजे में कहा सच बताओ दीदी ने कहा
बाहर चाय पी रहे है चाय उठाई और कमरे से बाहर निकला तो देखा जीजा के साथ कोई और भी
बैठा है पास जाकर देखा तो चौंक गया राजीव और निशा दोनों जीजा के साथ बैठे चाय की
चुस्की ले रहे थे राजीव ने कहा भाई कालेज नही जाना है क्या ?
निशा ने भी कहा जनाब को सपने देखने से फुर्सत ही कहाँ है मैंने कहा
मतलब,
राजीव बोला यार जल्दी तैयार हो देर हो रही है
स्नानघर से जैसे ही बाहर निकला मम्मी ने पूंछा निशा कैसी लगती है मैंने कहा मम्मी
मुझे नही पता मै तैयार होकर बाहर आया राजीव से बोला चलो भाई और जीजा जी से कहा शाम
को मिलते है कालेज पहुंचकर मैंने निशा से कहा तुम यही कैंटीन में रुको मुझे राजीव
से कुछ बात करनी है राजीव और मै एक किनारे जाकर बैठे मैंने राजीव कहा यार ये बता
ये निशा मेरे घर में कैसे पहुँच गयी राजीव ने मुझसे जो कहा उस पर यकीन नही हो रहा
था मै सोच में पड़ गया राजीव ने कहा छोड़ यार कोई बात नही निशा देखने में अच्छी लगती
है अच्छी लड़की और तुम्हे पसन्द भी करती है मैंने उससे तुम्हारे घर जाते समय पूंछा
था कि क्या तुम अजय को पसन्द करती हो ?
उसने कहा हाँ लेकिन अजय
शायद मुझे नही पसंद करता है तो मैंने उससे कहा तुम्हे अजय की मम्मी ने बुलाया है
वो थोडा डर गयी थी लेकिन मैंने कहा यार दरो मत कुछ नही होगा वो तुम्हारे पापा के
दोस्त की लड़की है ये वही निशा है जिससे तुम्हारी बचपन में सगाई हो चुकी है ये सब
तुम्हारी मम्मी ने मुझे बताया है तुम्हे कुछ नही याद है क्या ?
मैंने कहा पता नही यार,
वापस कैंटीन में आकर देखा
तो रश्मि और निशा किसी विषय पर बात कर रही थी राजीव ने रश्मि से कहा आज बहुत देर
कर दी रश्मि ने कहा हाँ यार घर में कुछ काम था निशा मुझे आज भी
देखकर शर्मा रही थी रश्मि ने कहा अब इतना भी मत शरमाओ कुछ बाद के लिए भी रखो,
रश्मि और राजीव दोनों हमें अकेला छोड़कर लाएब्रेरी की तरफ चले गये
निशा ने मुझे कहा राजीव से सब कुछ बता दिया होगा मैंने कहा नही यार मेरी उस बारे
में बोलने की हिम्मत नही पड़ रही है लेकिन उसने तुम्हारे बारे में सब कुछ जरुर बता
दिया है निशा ने कहा तुम्हारी मम्मी बहुत अच्छी है मैंने कहा हमारी मम्मी और हम
दोनों हंसने लगे तभी राजीव की आवाज सुनाई दी घर नही चलना क्या ?
पास आकर मैंने कहा चलो भाई घर पहुचते ही दीदी ने कहा अजय निशा कैसी
लड़की है कब से जानते हो मैंने कहा दीदी वो मीर क्लास में तभी पीछे से मम्मी की
आवाज आयी क्लास में क्या यही करने कालेज जाते हो,
पापा को आफिस से आने दो,
मैने मम्मी और से कहा प्लीज पापा से मत कुछ कहना आगे से कभी भी कुछ
गलत नही कहना बगल के कमरे से आते हुए जीजा जी ने कहा अजय को मत परेशान करो,
निशा को जैसे पंख लग गये थे लेकिन रश्मि और राजीव के बारे में सोंचकर
उसकी हालत खराब थी रश्मि ने आज भाभी को राजीव के बारे में बताने के लिए सोच रही थी
तभी भाभी ने कहा रश्मि दूध पी लो रश्मि ने कहा भाभी आप बैठो कुछ बात करते है अभी
मै शादी करने के लिए तैयार नही हूँ भाभी ने कहा क्या हो गया रश्मि ने कहा भाभी मै
एक लड़के से प्यार करती हूँ उसका नाम राजीव है मेरी अचानक से सगाई हो गयी है वह भी
उस लड़के से जिसे मै जानती भी नही हूँ और राजीव को ये सब बताने की मेरी हिम्मत भी
नही पड़ रही है पढ़ने में बहुत अच्छा है भाभी ने कहा रश्मि हम जिसे प्यार करते है
जरुरी नही है कि हमारी शादी उसी से हो,
कई बार हमें अपनी जिन्दगी
में समझौता करना पड़ता है तुम कुछ भी करना लेकिन कभी अपनी बुआ और भईया की
मान-मर्यादा को ठेंस न पहुचना और राजीव को अपनी सगाई के बारे में बता दो अगर वो
तुम्हे दिल से चाहता है तो वो यही चाहेगा कि तुम हमेशा खुश रहो और हाँ दो दिन बाद
हम तुम्हारे लिए लड़का देखने जा रहे है अब तुम भी सो जाओ|
अगले दिन मै जैसे ही राजीव के घर के घर पहुंचा अंकल ने कहा बेटा कल
राजीव को लड़की वाले देखने आ रहे है मैंने इस बारे में आज रात में राजीव को बताया
है कल तुम जरुर आना इतना सुनकर मेरी हालत ख़राब हो गयी अब मै रश्मि को क्या बताऊंगा
थोड़ी देर में राजीव आया मैंने कहा चलो यार देर हो रही है राजीव आज कुछ उदास दिख
रहा था कालेज पहुचकर राजीव ने कहा रश्मि को कैसे बताऊ तभी मुझे रश्मि और निशा
दोनों आती हुई दिखी मैंने कहा नाम लिया वो आ रही है रश्मि,
मै चूँकि थोडा बिंदास रहने वाला इंसान था कुछ भी हो जाये फिर हँसता
रहता था रश्मि से मैंने कहा भाभी कैसी हो राजीव को लड़की वाले देखने आ रहे है इतना
सुनकर निशा ने कहा यार पार्टी तो बनती है मैंने भी हाँ में हाँ मिला दिया रश्मि की
आँखों में आंसू थे राजीव कुछ भी बोल नही पा रहा था वो अब यही सोच रहा था कि वो रश्मि
के साथ बेवफाई हरगिज नही कर सकता है रश्मि भी रोने लगी,
अब राजीव भी अपने को नही रोक पाया वो भी रोने लगा राजीव ने रोते हुए
कहा अगर हम दोनों मिल नही सकते तो साथ में मर तो जरुर
सकते है मैंने राजीव से कहा कोई बात नही है हम लोग कोई न कोई विकल्प जरुर
निकललेंगे,
लेकिन सच तो ये है कि हमें भी कुछ समझ नही आ रहा
था राजीव के पापा और रश्मि की बुआ से इस बारे में कैसे बात की जाये ,
यही सब सोचते -२ मै कब घर
पहुच गया इसका कुछ पता ही नही चल सका,
जब मम्मी ने कहा अजय क्या
सोच रहे हो,
मै कुछ नही बोला सीधे अपने कमरे में जाकर बेड पर
लेट गया और सोचते-सोचते कब नींद आ गयी मुझे कुछ भी याद नही था लेकिन राजीव की
समस्या का एक समाधान जरुर खोज लिया था अचानक मम्मी की आवाज आई जल्दी फ्रेश होकर आ
जाओ अजय चाय तैयार है मै जल्दी से उठा और फ्रेश होकर सीधे रसोईघर पहुच गया देखा
वहाँ कोई नही है मैंने एक चाय निकाली बाहर आकर देखा मम्मी-पापा,
दीदी-जीजा के साथ एक कोई अंकल बैठे चाय पी रहे थे मम्मी ने मुझे
देखते ही बोला अजय ये निशा के पापा है मैंने उनके पैर छुए और पास में ही खड़ा हो
गया है सभी लोग आपस में फिर बात करने लगे,
अंकल ने पापा से इस बार जो
भी त्यौहार पड़े आपको हमारे घर आना पड़ेगा,
तभी मम्मी ने बीच में ही
कहा नही भाई साहब इस बार होली में आप भाभी और निशा सभी लोग हमारे घर आये,
मम्मी की बात पर पापा और दीदी ने भी जोर दिया तो अंकल ने आने के लिए
हामी भर दी,
थोड़ी देर बात करने के बाद अंकल ने कहा ठीक है मै
चलता हू क्योकि आफिस भी जाना है पापा ने अंकल को गेट तक छोड़ा और उसके बाद मै भी
तैयार होकर कालेज के लिए निकल गया,
निशा पहले से ही कैंटीन में
मेरा इंतजार कर रही थी पास पहुचकर निशा रश्मि और राजीव अभी नही आये क्या निशा ने
कहा आज उसे देखने लड़की वाले आ रहे है तो वो कालेज कैसे आएगा,
और रश्मि का पता ही नही है हाँ यार मै तो जाना ही भूल गया,
तभी निशा से कहा तुम्हे होली में मेरे घर आना है क्यों ?
मैंने उसे बताया कि उसके पापा मेरे घर आये थे मेरे पापा मम्मी ने
उसकी फेमिली को होली में आमंत्रित किया है और उसके पापा ने हामी भी भर दिया है
निशा ने कहा ठीक है
Today's love is a story base of hole type of love according to me
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